स्थिति इतनी बदतर हो गयी है कि, सरकारी नौकरी करने का उददेश्य देश भक्ति और जन सेवा न होकर महज दो नंबर की कमाई के लिये एक सरकारी पटट्ा हासिल करना मात्र रह गया है ! यदि किसी पर झूठा भी आरोप हत्या का मढ़ जाये पुलिस और वकील उसके सारे कर्म कर डालते हैं ,रही बची कसर अखबार पूरी कर डालते हैं ! पुलिस अंतिम दम तक उसकी जमानत नहीं होने देती और जेल में तब तक सड़ाने की कोशिश करती है तब तक कि फैसला न हो जाये और हमारे यहाँ फैसलों की यह हालत है कि एक एक मुकदमें को वर्षो सुनवाई होने में लगते हैं ! तब तक कई बसे बसाये आशियाने पूरी तरह नेस्तनाबूद हो चुकते हैं ! भले ही बाद में मुल्जिम निर्दोष सिध्द पाया जाये ! बाद में वकील या पुलिस सभी यह कह कर पिण्ड छुड़ाते हैं कि ''हानि लाभ जीवन मरण जस अपजस विधि हाथ '' दिलचस्प पहलू देखिये , हत्या के झूठे आरोप मात्र में बन्द आदमी के जो कर्म कर डालते हैं वही लोग अपने खुद के घरों में हत्यारों की ही पूजा करते हैं ,कौन होगा जो कृष्ण को नहीं पूजता होगा
दरअसल हम भारत वासी दोहरा चरित्र जीते हैं ,दिन भर जिसकी बुराई करते हैं रात को वहीं उसी की शरण या सान्निध्य में पहुंच जाते हैं ! वेश्या हो या भगवान जिसका अस्तित्व जो सार्वजनिक रूप से नकारा करते हैं ,अक्सर वे वहीं अंतत: जाते हैं ! सार्वजनिक रूप से शराब की निन्दा करने वालों को मैंने महफिलों में झूमते देखा है ! रिश्वत पर लम्बे भाषण की चाशनी बिखराने वालों को मैंने भ्रष्टाचार के समुंदर में अथाह गोते लगाते देखा है ! एक कहावत है कि ''बद अच्छा, बदनाम बुरा'' लगभग यही हालत सरकारी कार्यालयों की है ! वे बुरा काम करना चाहते हैं मगर बिना बदनाम हुये ! मेरे एक मित्र बहुत बड़े सरकारी पद पर थे ,मैने कभी कभार मजाक में उन्हें रिश्वत खाने पर उलाहना दिया , और उन्हें उनके इस बुरे काम के कई बुरे परिणाम समझाये और कहा कि बेटा बच के खेलना नही ंतो किसी न किसी दिन तगड़े निबटोगे ! वे हल्के से मुस्कराये और बोले अरे यार ''लेते पकड़ गये तो, दे के छूट जायेंगें ''
भारतीय दण्ड संहिता में कुल 511 धारायें हैं, अंग्रेजो को खतरा कृष्ण से था और उससे भी बड़ा खतरा कृष्ण की विचार धारा मानने वालों से था ! अगर भारतीय दण्ड संहिता को कृष्ण से मिलाया जाये तो मुझे नहीं लगता कि काेई धारा उसमें ऐसी हो जो कृष्ण पर लागू नहीं होती हो ! और सारी की सारी धाराओं में कृष्ण मुल्जिम न बनते हों ! कृष्ण गीता में भले ही कह गये हों या धमका गये हों कि ''मैं फिर फिर आऊंगा और हत्यायें करूंगा ! मगर सच ये है कि कृष्ण की मजाल नहीं जो अवतार ले कर दिखायें ! अगर आ गये कृष्ण तो भारत का शायद ही कोई थाना बचे जो हथकड़ी टांग कर कृष्ण को न ढूंढ़े ! फिर वही यक्ष प्रश्न कि क्या कोई ऐसा काम कृष्ण ने किया कि जिसे हम अपराध नहीं मानते ?
अब कृष्ण को मानने वालों का हश्र भिन्न कैसे हो सकता है !
आम भारतीय लगभग त्रस्त होकर उकता चुका है ! कभी कभार न्यायालयीन फैसलों की अच्छी बुनियादें उसमें उम्मीद की किरण फिर से जगा देतीं हैं , तो कई बार कुछ अच्छे मिसाली पुलिस अफसर उसमें फिर से एक जोश भर देते हैं और वह फिर लोकतंत्र को श्रध्दावनत होकर निहारने लगता है !भारतीय जीवन दोहरे माप दण्डों के घेर में है , चलो अंग्रेजो को तो हमें रोकना ही था मगर हम अब भी खुद को रोकें हैं यह तगड़ा विरोधाभास है, वे कृष्ण को नहीं आने देना चाहते थे बात लाजमी है ,मगर हम कृष्ण को आने से रोके बैठे हैं यह विरोधाभास है !सी. बी.एस.ई. ने राम और कृष्ण को काल्पनिक कहा यह अपने पुरखाें और बाप को काल्पनिक कहने वाली बात है ,क्या कल आने वाले समय में गांधी और नेहरू काल्पनिक नहीं होंगे ! यदि राम और कृष्ण किसी ने नहीं देखे तो ऐसे कितने होंगें ! जिन्होंने गांधी या नेहरू को देखा होगा ! चलो यहाँ तक ठीक है ! भारतीय गणराज्य का सर्वोच्च अधिपति महामहिम राष्ट्रपति देश को तथाकथित काल्पनिक कृष्ण के जन्म दिवस जन्माष्टमी पर राष्ट्र को शुभ कामनायें देता है यह विरोधाभास है, हमारा गौरवशाली जन नायक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री उसी काल्पनिक कृष्ण के जन्म दिन पर लोगों को शुभ कामना संदेश देता है यह विरोधाभास है !


bahut achha likhte hai aap
ReplyDeleteiske liye shukriya
आपकी लेख अच्छी है व विचारणीय है.आज आम आदमी की नजर में सबसे ज्यादा भर्स्ताचारी पुलिस या राजस्व विभाग वाले हैं,लेकिन मेरी नजर में वन विभाग,आबकारी विभाग, वाणिज्य कर विभाग तथा परिवहन विभाग सबसे बड़ा भार्स्ताचार का केंद्र है.छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में ये चारो विभाग बड़े नेताओं और अधिकरियों का चारागाह है.वनविभाग के जितने भी रचनात्मक कार्य हैं उसमे ८०% तक भार्स्ताचार होता है ,२०१० में कराये गए कार्य का प्रमाण मिला जिसकी शिकायत मैंने राज्य के राज्यपाल जी से की है. आबकारी विभाग के भार्स्ताचार से आम जनता प्रभावित होती है.वाणिज्य तथा परिवहन विभाग के बेरियर में लाखों रु. अवैध तरीके से रोज वसूली की जाती है वहीँ उड़नदस्ता के कर्मचरियों द्वारा ट्रक वालों से न जाने कितनी राशि वसूली की जाती होगी . कहा जाता है कि इस विभाग वालो कि करतूतों की शिकायत जिस फोरम करना चाहे कर लो लेकिन होता कुछ भी नहीं. फिर भी मैं 'सूचना के अधिकार' के तहत जानकारी लेकर सम्बन्धित कार्य का अवलोकन तथा उस कार्य को करने वालों से बातचीत कर विडिओ रिकार्डिंग कि सी.डी सहित राज्य के राज्यपाल जी से की है .अब देखना होगा भ्रस्ताचारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही होती है.
ReplyDeleteHon,ble Delhi High court allowed file PIL against “Indian Rupee symbol selection process”.
ReplyDeleteLink..
http://www.saveindianrupeesymbol.org/